दमण-दीव के जनप्रतिनिधियों और जनता को सीआरजेड के लिए अब तो जागना होगा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Monday, October 22, 2018
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • दमण-दीव के जनप्रतिनिधियों और जनता को सीआरजेड के लिए अब तो जागना होगा
    सीआरजेड 1991 में तटीय क्षेत्रों में लागू हुआ था। लेकिन दमण-दीव में 1996 में सीआरजेड लागू हुआ। उस वक्त सीआरजेड की जटिलता एवं प्रदेश के विकास में उसके दुष्परिणामों के बारे में किसी ने नहीं सोचा था। सीआरजेड लगने के बाद दमण-दीव वालों को समुद्र के किनारे निर्माण कार्यों में तत्कालीन प्रशासन द्वारा रोकने का काम शुरू किया गया तब जाकर जनता को अहसास हुआ कि छोटे से और विकसित संघ प्रदेश में सीआरजेड-2 तो बराबर था लेकिन सीआरजेड-3 जो जबरन अविकसित एरिया के तहत थोप दिया गया जिससे ग्रामीण क्षेत्र में विकास और तरक्की के द्वार बंद हो गये। 2014 में तत्कालीन अधिकारियों ने सीआरजेड-3 में पर्यटन क्षेत्र के लिए 60 मीटर का ही नो डेवलपमेंट जोन का प्रावधान रखने वाला ड्राफ्ट नोटीफिकेशन जारी किया था। लोगों ने भारी तादाद में सीआरजेड-3 के खिलाफ अपनी-अपनी आपत्ति और सुझाव दिये थे लेकिन दमण-दीव का हाईटाइड और लॉटाइड लाइन वाला अधिकृत नक्शा तैयार न होने की वजह से भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दमण-दीव के ड्राफ्ट नोटीफिकेशन को ही रद्द कर दिया और ना जनप्रतिनिधियों का पता चला और ना ही जनता को। सीआरजेड में राहत का वादा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश की जनता से किया था। 2019 में फिर से लोकसभा का चुनाव है। प्रशासन ने 2011 के पुराने ढोल पर पुरानी ताल के तहत नोटीफिकेशन तो जारी किया है लेकिन जनप्रतिनिधियों और जनता को प्रशासन से अब सवाल करना होगा कि 2018 का पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का ड्राफ्ट सीआरजेड नोटीफिकेशन-2018 पर प्रशासन कब काम करेगा? इस बार भी हम नहीं जागे तो और 20 सालों तक सीआरजेड-3 के चक्रव्यूह में फंसे रहेंगे। लोगों की होटलें, घर एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान सीआरजेड के नाम पर प्रशासन तोडता रहेगा और हम लाचार होकर इसे देखते रहेंगे।

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