दमण के औद्योगिक क्षेत्रों में ओपन स्पेस, ग्रीन बेल्ट और नालों पर से प्रशासन हटायेगा अवैध कब्जा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Wednesday, December 12, 2018
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  • दमण के औद्योगिक क्षेत्रों में ओपन स्पेस, ग्रीन बेल्ट और नालों पर से प्रशासन हटायेगा अवैध कब्जा
    - कभी भी शुरू हो सकती है प्रशासन की अवैध कब्जा हटाओ मुहिम - भारत इंडस्टीयल एस्टेट भीमपोर, दमण इंडस्टीयल एस्टेट और गोल्डन इंडस्टीयल एस्टेट दाभेल, गणेश इंडस्टीयल एस्टेट कचीगाम तथा भेंसलोर और कडैया के औद्योगिक क्षेत्रों में ओपन प्लॉट, ग्रीन बेल्ट और नालों पर चॉल एवं दुकानें बनाकर कर रखा है अवैध कब्जा
    असली आजादी ब्यूरो, दमण 07 फरवरी। दमण के औद्योगिक क्षेत्रों में ओपन प्लॉट, ग्रीन बेल्ट और नालों पर से अवैध कब्जा हटाने का अभियान प्रशासन द्वारा कभी भी शुरू हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत इंडस्टीयल एस्टेट भीमपोर, दमण इंडस्टीयल एस्टेट और गोल्डन इंडस्टीयल एस्टेट दाभेल, गणेश इंडस्टीयल एस्टेट कचीगाम तथा भेंसलोर और कडैया के औद्योगिक विस्तारों में ओपन प्लॉट, ग्रीन बेल्ट और नालों पर कब्जा करते हुए चॉल एवं दुकानें बना रखी है। यह सभी अवैध है, क्योंकि ओपन स्पेस और ग्रीन बेल्ट पर सरकार का अधिकार होता है। दूसरे शब्दों में कहे तो ऐसे सरकारी जमीन ही माना जायेगा। ओपन स्पेस और ग्रीन बेल्ट की जगहों में सरकार जनहित से जुडे कार्य शुरू करवा सकता है। जहां तक नालों की बात है तो नालों पर कब्जे की वजह से बरसाती पानी की निकासी में पिछले ढाई दशक से काफी समस्या हो रही है। हर वर्ष बरसाती पानी औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों एवं आसपास के रिहायशी इलाकों में भर जाता है। जिसकी वजह से कीमती समान, मशीनें, रिहायशी इलाकों में बने घरों में रखे गृहस्थी के सामानों को नुकसान पहुंचता है। गौरतलब है कि 90 के दशक में केन्द्र सरकार ने दमण को टैक्स होली-डे के रूप में घोषित किया। इसके बाद दाभेल, कचीगाम, भीमपोर, कडैया, भेंसलोर जैसे क्षेत्रों में तत्कालीन लैंड डेवलपर्सों ने जमीन खरीदकर इसे एनए करवाकर इंडस्टीयल एस्टेट बना दिये थे। नियम के अनुसार हरेक इंडस्टीयल एस्टेट में ओपन स्पेस और ग्रीन बेल्ट के लिए जगह छोडी गई थी। इसी तरह पुराने दमण के नक्शे के मुताबिक, बरसाती पानी के कुदरती निकासी के नाले (कलवट) भी इसी औद्योगिक क्षेत्रों में गुजरते थे। समय बीतता गया और सभी इंडस्टीयल एस्टेट टैक्स होली-डे के चलते बिक गये। अब लोगों की नजर औद्योगिक क्षेत्रों के ओपन स्पेस और ग्रीन बेल्ट की जमीनों पर पडी। प्रशासन के पास सही-सही डाटा अब तक उपलब्ध नहीं था जिसके चलते कुछ तत्वों ने सभी औद्योगिक क्षेत्रों में सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित रखी हुई ओपन स्पेस और ग्रीन बेल्ट की जमीनों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। लेकिन अब प्रशासन ने सभी औद्योगिक क्षेत्रों के पुराने डाटा और वर्तमान में इन जमीनों की स्थिति का माप करवाया तब पता चला कि ज्यादातर जमीनें कुछ लोगों के कब्जे में है और इन जमीनों पर अवैध कब्जा जमाये बैठे है। इसी तरह बरसाती पानी के निकासी के लिए कुदरती नालें (कलवट) पर भी कब्जा कर उसको भी दबाये बैठे है। प्रशासन ने कुदरती नालों (कलवट) को भी उसकी मूल स्थिति अनुसार करने का फैसला ले लिया है और उस पर काम भी शुरू हो गया है।

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