दमण से तरुणा पटेल, सिंपल टंडेल, पुष्पाबेन धुका, लक्ष्मी माछी, हसुमति टंडेल, अरुणा पटेल सहित महिलाओं का दल 10 जून से शुरु करेगा कैलाश मानसरोवर यात्रा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Thursday, June 21, 2018
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  • दमण से तरुणा पटेल, सिंपल टंडेल, पुष्पाबेन धुका, लक्ष्मी माछी, हसुमति टंडेल, अरुणा पटेल सहित महिलाओं का दल 10 जून से शुरु करेगा कैलाश मानसरोवर यात्रा
    - शुरू हो गई दुनिया के सबसे ऊंचे शिवधाम कैलाश मानसरोवर की यात्रा
    नई दिल्ली (ईएमएस)। कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुक्रवार से शुरू हो गई है। दुनिया के सबसे ऊंचे शिवधाम कैलाश मानसरोवर को 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि यह भगवान शिव का निवास है। हर साल कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए लाखों श्रद्धालु जाते हैं। दमण की बात करें तो सांसद लालू पटेल की धर्मपत्नी तरुणा पटेल, दामिनी वुमेंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सिंपल टंडेल, माछी महाजन महिला मंडल की प्रमुख पुष्पाबेन धुका, दमण म्युनिसिपल की उपप्रमुख लक्ष्मीबेन माछी, माछी महाजन की उपप्रमुख लक्ष्मीबेन गोपाल, हसुमति टंडेल, अरुणा पटेल, कुंता मंदिर के महाराज सपत्निक सहित महिलाओं की टीम 10 जून से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जायेगी। दमण-दीव के इतिहास में पहली बार महिलाओं का दल इस कठीन यात्रा पर जा रहा है। कैलाश मानसरोवर चीन के तिब्बत में स्थित है। इसके अलावा एक छोटा कैलाश धाम भी है जो उत्तराखंड की सीमा पर भारत के इलाके में है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए 2 रास्ते हैं। पहला उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा है और दूसरा सिक्किम का नाथुला दर्रा। कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए नेपाल से होकर जाना पड़ता है। पिछले साल चीन ने नाथुला दर्रे को बंद कर दिया था,जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार नाथुला दर्रा खुला है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा ठंडे और ऊंची पर्वतीय इलाकों से तय होती है। इस यात्रा पर जाने के लिए शारीरिक रुप से फिट होना बहुत जरूरी है। शारीरिक फिट के आधार पर ही यात्रा पर जाने के लिए श्रद्धालुओं का चुनाव सरकार करती है। यह यात्रा करीब एक महीने में पूरी होती है। अगर आप कम समय में यात्रा पूरी करना चाहते हैं तो आपको थोड़ा बजट बढ़ाना पड़ेगा। कैलास मानसरोवर के लिए कई कंपनियां हवाई सेवा उपलब्ध करती हैं। इसमें एक से सवा लाख रुपये का खर्च आता है। हालांकि इस बार हवाई यात्रा थोड़ा मुश्किल है। लखनपुर से नजंग के मध्य खराब मार्ग को लेकर चल रहे असमंजस के बीच कैलास मानसरोवर यात्रियों को अब पैदल ही शिव धाम तक पहुंचना होगा। हेलीकॉप्टर द्वारा पिथौरागढ़ से गुंजी उतारे जाने का प्रस्ताव स्थगित हो चुका है। पूर्व की भांति कैलास मानसरोवर यात्रा श्रीनारायण आश्रम से पैदल होगी। पांच पैदल पड़ाव पार कर यात्रा दल तिब्बत में प्रवेश करेगा। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कैलास मानसरोवर यात्रा और भारत चीन व्यापार के संबंध में आयोजित बैठक में इसकी घोषणा की। बुधवार को आयोजित बैठक में कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में लखनपुर से नजंग के मध्य 1600 मीटर मार्ग को लेकर चर्चा की गई। कैलास मानसरोवर यात्रा, भारत चीन व्यापार और माइग्रेशन को देखते हुए सीमा सड़क संगठन को इस अवधि के मध्य इस स्थान पर मार्ग निर्माण का कार्य रोकने के निर्देश दिए गए। पिथौरागढ़ के डीएम ने कहा कि कैलास मानसरोवर यात्रा अपने परंपरागत मार्ग से ही हो रही है। जनप्रतिनिधियों ने चीन सीमा लिपूलेख तक निर्माणाधीन सड़क में अनावश्यक विलंब के लिए बीआरओ को जिम्मेदार ठहराया।

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