श्रीमती देवकी बा मोहन सिंह चौहान कॉमर्स, आर्ट्स साइंस एंड लॉ कॉलेज पर चला प्रशासन का हथौड़ा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Monday, May 28, 2018
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • श्रीमती देवकी बा मोहन सिंह चौहान कॉमर्स, आर्ट्स साइंस एंड लॉ कॉलेज पर चला प्रशासन का हथौड़ा
    - कॉलेज प्रशासन का दावा कि हमने रिंग रोड का चेंज करा लिया था एलाइनमेंट - प्रशासन का एलाइनमेंट चेंज करने से इनकार, कहा कि जब 40000000 रुपए मुआवजा लिया है तो जमीन तो खाली करनी ही पड़ेगी - आम जनता के पैसे से बनी करोड़ों की बिल्िंडग पर चले हथौड़े का दोषी प्रशासन अथवा स्कूल का ट्रस्ट?
    असली आजादी ब्यूरो, सिलवासा 16 मई। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली के सिलवासा शहर में जैसे ही सुबह 6 बजे वैसे ही संजीभाई रूपजीव डेलकर मार्ग पर स्थित लायंस इंग्लिश स्कूल परिसर में प्रशासन का लंबा काफिला, भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ जेसीबी मशीनों के सहित किसी युद्ध के मैदान की तरह उतार पड़ा और देखते ही देखते देवकी बा मोहन सिंह चौहान ऑर्ट्स कॉमर्स साइंस तथा लॉ कॉलेज की बिल्िंडग पर तोडक कार्रवाई शुरू कर दी। इसके पूर्व कॉलेज परिसर में घुसने के लिए प्रशासन ने कॉलेज के बाउंड्री वॉल को भी तोड़कर धराशायी कर दिया। जहां से रिंग रोड निकलने वाली है। अफरा-तफरी के इस माहौल में सुबह कॉलेज में कुछ लोग जमा हो गए जबकि एक-दो लोग कॉलेज के भी आ गए, जिन्होंने कॉलेज के अंदर रखे कम्प्यूटर और दूसरी जरूरी वस्तुओं को बाहर निकाला। प्रशासन का हथौड़ा देर शाम तक चलता रहा क्योंकि जिस बिल्िंडग पर प्रशासन तोड़क कार्रवाई चला रहा था। वह काफी बड़ी बिल्िंडग है और लगभग 7000 स्क्वॉयर फुट एरिया में प्रशासन को तोडक कार्रवाई चलानी है। प्रशासन द्वारा अचानक की गई इस तोडक कार्रवाई से स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया और आम जनता ट्रस्टियों के ऊपर आवाज उठाने लगी हैं कि आखिर ट्रस्टियों ने बिना सरकारी परमिशन के पब्लिक के पैसे से इतनी बड़ी बिल्डिंग कैसे बनाई? जबकि जिस पैसे से बिल्िंडग बनाई गई है वह गरीब विद्यार्थियों के परिजनों से प्राप्त की गई फीस और अन्य माध्यमों से है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब यह पब्लिक मनी है तो स्कूल प्रशासन को बिना नियम-कानून के ऐसे बिल्डिंग बनाना ही नहीं चाहिए जितना दोषी स्कूल के ट्रस्टी हैं इस मामले में उतने ही दोषी प्रशासन की एजेंसियां भी कही जाएंगी जिनके सामने इतना बड़ा स्ट्रक्चर खड़ा हो गया बिना परमिशन के और उसे रोकने की कोशिश तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नहीं की गई। करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई पब्लिक की इस बिल्डिंग को ऐसे तोड़ा जा रहा है जैसे गरीब के पैसों की कोई कीमत ही ना हो। इस मामले में जब स्कूल और कॉलेज ट्रस्ट के पदाधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि लायंस इंग्लिश स्कूल ट्रस्ट ने एक आवेदन कर 24 /11/ 2016 को रिंग रोड के एलाइनमेंट को चेंज करा लिया था और प्रशासन ने इस बारे में एक आदेश भी जारी कर नगरपालिका को सूचित भी कर दिया था और इस बारे में नया नक्शा भी उपलब्ध कराया गया था। जिसके कारण इस बिल्िंडग को बनाया गया था। वहीं प्रशासन की तरफ से तोडक कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले सिलवासा के मामलतदार टी. एस. शर्मा का कहना है कि लायंस इंग्लिश स्कूल और देवकी बा मोहन सिंह चौहान कॉलेज के ट्रस्टियों द्वारा इस मामले में गुमराह करने वाली नीति अपनाई जा रही है। शर्मा का कहना है कि प्रशासन ने जो आदेश जारी किया गया था उस आदेश में साफ-साफ लिखा है कि अगर एलाइनमेंट चेंज करवाना है तो बगल में खुद की जमीन उपलब्ध करानी होगी। इस मामले में कॉलेज ट्रस्ट द्वारा जो जमीन एलाइनमेंट चेंज के रूप में उपलब्ध कराई जा रही थी वह जमीन सरकारी जमीन है। ऐसे में कॉलेज ट्रस्ट द्वारा 2017 में चार करोड़ रुपए जमीन का मुआवजा लिये जाने के बाद यह कहना कि अब आप रिंग रोड सरकारी जमीन में बना लो तो वह कहां तक उचित होगा। प्रशासन का कहना है कि अगर उन्हें एलाइनमेंट चेंज करना था तो उन्होंने प्रशासन से चार करोड़ रूपए का मुआवजा किस बात का लिया और मुआवजा लेने के बाद अगर कॉलेज की ट्रस्टी यह कहते हैं कि उन्हें नोटिस नहीं दिया गया तो जिस दिन मुआवजा उन्होंने लिया है उसी दिन से यह जमीन सरकार की हो जाती है और सरकार कभी भी अपनी जमीन खाली करा सकती है। शर्मा का कहना है कि रिंग रोड का काम तेजी से पूरा करना है इसीलिए रिंग रोड के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को इसी तरह से साफ किया जा रहा है और यह प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जिन लोगों ने मुआवजा लिया है वह अपनी-अपनी जमीन खाली कर दें अन्यथा प्रशासन उसे अपने स्तर से खाली कराएगा। अगर जो लोग अपनी जमीन खाली नहीं करते हैं और उन पर तोडक कार्रवाई की जाएगी तो उस तोडक कार्रवाई का खर्चा भी मुआवजा लेने वाले व्यक्ति से वसूला जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि इस मामले में दोषी कौन है क्या वे मासूम लोग दोषी हैं जिन्होंने अपने खून पसीने की कमाई से इस कॉलेज को बनाने में करोड़ों रुपए अपने बच्चों को पढ़ाने के नाम पर दिए हैं अथवा वे लोग दोषी हैं जो इस कॉलेज को चलाते हैं और अपनी समाज में प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए इस तरह के गैरकानूनी तरीके से बिल्डिंग को खड़ा करके प्रशासन को चुनौती देना चाहते हैं? प्रशासन भी इस मामले में किसी भी पक्ष से सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि जब बिल्िंडग बनाई जा रही थी उसी समय प्रशासन को हस्तक्षेप कर बिल्िंडग के कार्य को रोकना चाहिए था जिससे कि पब्लिक का करोड़ों रुपए बच सकता था ? लेकिन ऐसा हुआ नहीं
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