गुजरात में संभवित जल संकट से दमण-दीव और दादरा नगर हवेली को लेना होगा सबक - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Monday, May 28, 2018
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  • गुजरात में संभवित जल संकट से दमण-दीव और दादरा नगर हवेली को लेना होगा सबक
    - दमण-दीव और दादरा नगर हवेली पानी के मामले में 80 प्रतिशत से ज्यादा है गुजरात राज्य पर निर्भर - गुजरात के ज्यादातर जलाशयों की हालत गंभीर - नर्मदा नदी खुद संकट में - मध्य गुजरात, उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र में भी हालात चिंताजनक - दक्षिण गुजरात की भी स्थिति पिछले सालों के मुकाबले काफी कमजोर - दीव को सौराष्ट्र देता है पानी और दमण तथा दादरा नगर हवेली को दक्षिण गुजरात के जलाशय मधुबन डेम से मिलता है पानी
    असली आजादी ब्यूरो, दमण, 08 फरवरी। पानी के मामले में पिछले डेढ दशक से समृद्ध रहा गुजरात पानी संकट से जूझ रहा है। गुजरात की जीवनरेखा समान नर्मदा नदी गर्मी के मौसम से पहले ही दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है। मध्य गुजरात, सौराष्ट्र, उत्तर गुजरात की हालत अभी से ही चिंताजनक स्थिति में है। जबकि दक्षिण गुजरात की हालत भी पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कमजोर है। गुजरात सरकार पानी के मुद्दे पर बचाव की स्थिति में नजर आ रही है। गुजरात के इस पानी संकट से दमण-दीव और दादरा नगर हवेली की चिंता बढना स्वाभाविक है। क्योंकि सौराष्ट्र में स्थित केन्द्रशासित प्रदेश दीव को पानी सौराष्ट्र के रावल डेम से मिलता है। जबकि दक्षिण गुजरात में स्थित केन्द्रशासित प्रदेश दमण और दादरा नगर हवेली को पानी मधुबन डेम से मिलता है। रावल डेम में हालत गंभीर होना मतलब की दीव को पानी की जबरदस्त किल्लत से सामना करने की तैयारी से जोडा जाता रहा है और पूर्व के वर्षों में कई बार ऐसे हालात पैदा हुए थे जिसके चलते दीव में कई महीनों तक पानी के लिए संघर्ष और आक्रोश चलता रहा था। दमण और दादरा नगर हवेली में तो जब मधुबन डेम की नहरों के रखरखाव के समय ही कुछ दिनों के लिए पानी की किल्लत आती थी। लेकिन इस वर्ष गुजरात राज्य की जो स्थिति है वह काफी चिंताजनक है। क्योंकि सौराष्ट्र में गर्मी कामौसम शुरु होने से पहले ही लोग पानी-पानी चिल्लाने लगे हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि 15 अप्रैल तक सौराष्ट्र के जलाशयों में पानी उपलब्ध रहेगा लेकिन यदि इसी बीच कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो हालात बेकाबू हो जायेंगे। ऐसी स्थिति में अभी से दीव के लिए सोचने की जरुरत है। दमण और दादरा नगर हवेली को पानी देने वाले मधुबन डेम की स्थिति के आंकडे अभी तक प्राप्त नहीं हुए लेकिन प्रशासन को अभी से ही दमण और दादरा नगर हवेली के लिए भी गंभीरता से सोचने की जरुरत है। क्योंकि दोनों संघ प्रदेशों में औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते आबादी ज्यादा है। 10-15 साल पहले दमण और दादरा नगर हवेली में जो पानी की मांग थी वह मांग 5 गुना बढ चुकी है। दमण-दीव और दादरा नगर हवेली 80 प्रतिशत से ज्यादा गुजरात राज्य के जलाशयों पर निर्भर है। ऐसे में गुजरात का संकट अप्रत्यक्ष रुप से दमण-दीव और दादरा नगर हवेली का भी संकट माना जायेगा। गुजरात के जलाशयों में इस वर्ष पैदा हुए जलसंकट से अब दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली को सबक लेते हुए दोनों संघ प्रदेशों को पानी के मुद्दे पर ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर बनने की ओर ठोस प्रोजेक्ट तैयार करने होंगे। दमण-दीव और दादरा नगर हवेली में कई तालाब हैं, इन तालाबों को गहरा करने का काम जल्द शुरु करने की जरुरत है। दमण और दादरा नगर हवेली में हजारों औद्योगिक ईकाईयां है जो हर वर्ष संघ प्रदेशों की भूमि से लाखों क्यूसेक पानी का दोहन करती हंै। जिसके सामने वाटर रिचार्ज की जो जिम्मेदारी है वह नहीं निभा रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि दोनों संघ प्रदेशों के लिए वाटर रिचार्ज पर आदेश जारी करें और उस पर सख्ती से अमल भी करवायें। बडी-बडी बिल्डिंगों, होटलों, सरकारी कार्यालयों, पंचायत घरों में भी बरसाती पानी को भूमि तक पहुंचाने के लिए उसे भी वाटर रिचार्ज करना अनिवार्य करवाये। दोनों संघ प्रदेशों की नदियों में चेकडेम भी बनाने का समय अब आ चुका है।

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