दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने प्रधानमंत्री, गुजरात सरकार एवं नोटबंदी पर किया तीखा प्रहार - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Saturday, September 23, 2017
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  • दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने प्रधानमंत्री, गुजरात सरकार एवं नोटबंदी पर किया तीखा प्रहार
    - वलसाड के नानापोंढा में हुआ किसान मुक्ति दिवस एवं सनद वितरण स्वर्ण जयंति समारोह - ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी इंचार्ज कम्युनिकेशन रणदीप सिंह सुरजेवाला और दमण-दीव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल ने सरकार पर किसानों एवं आदिवासियों को भूलने का लगाया आरोप
    असली आजादी ब्यूरो, दमण, 3 सितंबर। वलसाड जिले के नानापोंढा डेपो मैदान में आज कांग्रेस द्वारा किसान मुक्ति दिवस एवं सनद वितरण के स्वर्ण जंयति कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कई दिग्गज कांग्रेसियों ने प्रधानमंत्री, गुजरात सरकार, नोटबंदी सहित पर तीखा प्रहार किया। इस जनसभा में रणदीप सुरजेवाला ने किसानों एवं आदिवासियों के साथ अनदेखा करने का गुजरात सरकार पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किसानों एवं आदिवासियों को जमीन का अधिकार देने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा किसानों की हितैशी रही है। इस मौके पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी इंचार्ज कम्युनिकेशन रणदीप सिंह सुरजेवाला और दमण-दीव प्रदेश अध्यक्ष केतन पटेल ने संयुक्त रुप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर नोटबंदी को लेकर आरबीआई द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट के बाद उठे सवालों पर जवाब देने की बात की है। अपने स्टेटमेंट में कहा है कि आरबीआई की रिपोर्ट अनुसार केवल 16000 करोड रूपये ही बैंकों में नहीं आये है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एटर्नी जनरल ने दावा किया था कि नोटबंदी से 3 से 5 लाख करोड रूपये का काला धन जमा नहीं होगा। आरबीआई के अनुसार केवल 16000 करोड रूपये ही बैंकों में जमा नहीं हुए है और दूसरी ओर नये नोट छापने के लिये रूपये 25,391 करोड खर्च किये गये है। ऐसे में 16000 करोड रूपये बचाने के लिये रूपये 25391 करोर्ड खर्च करने का तर्क प्रधानमंत्री बतायें। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की थी कि नकली नोटों का पता लगाने के लिए डिमोनेटाईजेशन के पीछे तर्क था। यहां तक कि वित्त मंत्रालय ने 8 नवंबर, 2016 को अपनी प्रेस विज्ञप्ति में नकली मुद्रा का पता लगाने के लिए कहा था कि डिमोनेटाईजेशन इसका कारण है। आरबीआई रिपोर्ट ने इस दावे के झूठ का खुलासा किया है कि 15.28 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा वापस आ गयी, केवल 41 करोड़ रुपये नकली पाए गए, अर्थात 0.0013%। जब 99.998% मुद्रा वास्तविक पायी गयी है, तो प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए पूरे तर्क पूरी तरह असफल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मुद्रीकरण के लिए दिए गए एक अन्य कारण अनुसार आतंकवाद और नक्सलवाद को रोक दिया गया था। तथ्य यह दावा गलत मानते हैं। डिमोनेटाईजेशन के बाद जम्मू और कश्मीर में अकेले 36 प्रमुख आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिसमें 58 सेना के सैनिक शहीद हुए और 36 नागरिक मारे गए। इसके अलावा, नोटबंदी के बाद 13 बड़े नक्सल हमलें हुए, जिसमें 69 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 81 नागरिक मारे गए। इन आंकड़ों के मद्देनजर प्रधानमंत्री के दावे का तर्क क्या है? प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए आखिरी कारण अर्थव्यवस्था में डिजीटल लेनदेन को बढ़ावा देना था। यहां तक कि यह तर्क विफल हो गया है। नवंबर 2016 में (नोटबंदी से पहले), हमारी अर्थव्यवस्था में डिजीटल लेनदेन के मूल्य 94 लाख करोड़ थे जुलाई 2017 में डिमोनेटाईजेशन के डिजीटल लेन-देन का मूल्य 104 लाख करोड़ था, यानि पूर्व-नियतकरण अवधि के मुकाबले केवल 10 लाख करोड़ रूपए की बढ़ोत्तरी हुई है। सच्चाई यह है कि कांग्रेस-शासन के दौरान डिजीटल लेनदेन में सबसे बड़ी वृद्धि हुई है। 2011-12 से 2012-13 के बीच, डिजीटल ट्रांजेक्शन 53% तक बढ़ गया। 2012-13 से 2013-14 के बीच, डिजीटल लेनदेन फिर से 49% की वृद्धि हुई यह आंकड़ा प्रधानमंत्री के दावों को पूरी तरह से शिकस्त देता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए हर कारण, नरेन्द्र मोदी को झूठा साबित कर देता है, 125 करोड़ भारतीयों का मानना है कि प्रधानमंत्री को इन सवालों का जवाब देना होगा। बैंक लाइनों में मरने वाले करीब 150 साधारण नागरिकों की मृत्यु के लिए कौन जिम्मेदार है? 104 मौकों पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बार-बार दोहराए और बदले जानेवाले नियमों के दोहराव से हुई घबराहट और परिणामी नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है? डिमोनेटाईजेशन के कारण लगभग 15 लाख नौकरियों के नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है? पूरे जीवनकाल में किए गए गृहणियों की पूरी बचत के घाटे के लिए कौन जिम्मेदार है? छोटे दुकानदारों और छोटे और मध्यम उद्यमों के कारोबार के टूटने के लिए जिम्मेदार कौन जिम्मेदार है? अंत में, 9.2% से 5.7% तक जीडीपी के संकुचन के लिए जिम्मेदार है, जिसके परिणामस्वरूप 3 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है? सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चुक के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं। यह प्रधानमंत्री के लिये खुद जवाबदेही बताने का समय है। इस कार्यक्रम में गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी, राजस्थान के पूर्व मुख्य मंत्री एवं एआईसीसी के महामंत्री अशोक गेहलोत, गुजरात प्रदेश के पूर्व प्रमुख अर्जुन मोढवाडिया, सीएलपी मोहनसिंह राठवा, तुषार चौधरी, किशन पटेल, कपराडा के विधायक जीतु चौधरी सहित के कई कांग्रेसी नेता मौजूद रहे। इस जनसभा में बडी संख्या में वलसाड, नवसारी, डांग सहित के किसान एवं आदिवासी युवा मौजूद रहे।

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