मोदी-शिंजो आबे मुलाकात: बुलेट के साथ बैलेट पर निशाना? - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Saturday, September 23, 2017
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • मोदी-शिंजो आबे मुलाकात: बुलेट के साथ बैलेट पर निशाना?
    अहमदाबाद। पीएम नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे अहमदाबाद में आठ किमी लंबा रोडशो करने के बाद गुरुवार को बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखेंगे। वैसे तो इसको पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्­ट माना जा रहा है लेकिन साथ ही इसके सियासी निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी पहली बार किसी विदेशी पीएम के साथ रोडशो कर रहे हैं। इसको गुजरात में पीएम नरेंद्र मोदी के हालिया रोडशो की अगली कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। गुजरात में इस साल के आखिर तक राज्­य विधानसभा चुनाव होने जा रहेे हैं। इसके मद्देनजर हालिया महीनों में पीएम नरेंद्र मोदी इससे पहले दो बार रोडशो कर चुके हैं। गुजरात चुनाव के लिहाज से ही राज्­य को बुलेट ट्रेन की सौगात और इस रोडशो को जोड़कर देखा जा रहा है। उल्­लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे गुरुवार को अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखेंगे। जापान के सहयोग से इस प्रोजेक्ट के पूरा होने में लगभग पांच साल लगेंगे और आम जनता को 2022 तक बुलेट ट्रेन चढ़ने का मौका मिलेगा। वैसे दुनिया के जिन देशों में फिलहाल हाई-स्पीड ट्रेन चल रही हैं उनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चाइना, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, ताइवान, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और उजेबकिस्तान शामिल हैं। पांच साल बाद भारत का नाम भी इसमें शुमार हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में तकनीकी सहयोग के लिए जापान को चुनने के पीछे उसकी तकनीक और सुरक्षात्मक पहलू हैं। जापान की बुलेट ट्रेन ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं और अब तक कोई भी बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है। वैसे दुनियाभर में सबसे बड़े हाई-स्पीड ट्रैक वाले नेटवर्क की बात करें तो चीन सबसे आगे है। चीन के पास लगभग 22,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक है। दुनिया में सबसे तेज बुलेट ट्रेन भी चीन में ही चलती है। लगभग 350 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली यह ट्रेन 1250 किमी की यात्रा साढ़े चार घंटे में ही पूरी कर लेती है।

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